good habits speech

Good Habits Speech-ऐसे बदलें बुरी आदतों को

ऐसे बदलें बुरी आदतों को-Good Habits Speech

दैनिक जीवन में जिस कार्य को हम नियमित रूप से करते हैं या रोजाना जिस कार्य का हम अभ्यास करते हैं, वह एक रोज हमारे जीवन में शामिल हो जाता है, जिसे हम आदत कहते हैं. आदतें अच्छी या बुरी दोनों ही प्रकार की होती है.

जो इंसान अपने आप को अच्छा इंसान बनाना चाहता है वह अच्छी आदतें पालता है. वह हमेशा अच्छे कार्य करता है, हमेशा सकारात्मक सोच रखता है. रोजाना यह अभ्यास करने से अच्छे कार्य उसकी लाइफ में शामिल हो जाते हैं और फिर यही उसकी अच्छी आदतें बन जाती हैं. तत्पश्चात इनकी बदौलत वह इन्सान स्वयं को अच्छा इन्सान बना पाने में कामयाब हो जाता है..

जो इंसान बुरे कार्यों में रुचि रखता है या जो अपने जीवन में कोई खास मकसद नहीं रखता, उसका बुरा अभ्यास उसकी आदतों को बुरी आदतों में बदल देता है. हाँ, ये बिलकुल संभव है कि वह चाहे तो अपनी बुरी आदतों को अच्छी आदतों से बदल सकता है, लेकिन उसका शरीर और मष्तिष्क इस बात के लिए उसे आसानी से तैयार नहीं होने देते. और फिर वह लगातार नकारात्मक सोच और नकारात्मक कार्य करने से बुरी आदतों का गुलाम बन जाता है, जिससे फिर उसका समस्त जीवन नरक सदृश्य बन जाता है.

अब सवाल यह उठता है कि हम अपनी आदतों को कैसे बदल सकते हैं? वह कौन से तरीके हैं जिनसे हम अपनी बुरी आदतों को अच्छी आदतों में बदल सकते हैं?  हम अपने आप को और भी बेहतर कौन सी आदतों द्वारा बना सकते हैं? तो आइये आज की पोस्ट- ऐसे बदलें बुरी आदतों को (Good Habits Speech)  में हम यही जानेंगे कि बुरी आदतों को अच्छी आदतों से कैसे बदला जा सकता है, इसमें कितना समय लगता है और ऐसा करने हेतु हमको किन-किन बातों का ध्यान रखने की विशेष आवश्यकता होगी?

आदतों का निर्माण कैसे होता है (How to make Good Habit or Bad Habit)?

विद्वानों का मानना है कि यदि किसी भी कार्य को कुछ दिन तक लगातार किया जाए तो वह हमारे अभ्यास में शामिल हो जाता है. फिर हमारा शरीर उस कार्य को बिना किसी सवाल-जवाब के खुद में अपना लेता है और इस प्रकार वह हमारी आदत में शामिल हो जाता है.

फिर उस कार्य को करने के लिए हमें अपने दिमाग पर जोर नहीं डालना पड़ता. हमारे शरीर की मांसपेशियां उस चीज की अभ्यस्त हो जाती हैं.  हमारा शरीर उस चीज को अपने आप ही ग्रहण कर लेता है और इस प्रकार वह आदत या वह कार्य स्वयं से ही संचालित होता रहता है.

पहली बार जब भी हम कोई नया कार्य करते हैं तो हमारा दिमाग उस वक्त हम से सवाल-जवाब आरंभ करता है क्योंकि हमारा मष्तिष्क किसी भी चीज को आसानी से यूँ ही स्वीकार नहीं कर लेता. जब हम उसको संतोषजनक जवाब दे देते हैं तो फिर हमारा दिमाग अगली बार वही कार्य फिर से दोहराने पर हमसे कोई भी सवाल-जवाब नहीं करता. तब वह कार्य लगातार हमारे जीवन में शामिल हो जाता है और हम आदत के वशीभूत होकर उसे निरंतर करते चले जाते हैं.

इसे हम एक उदाहरण से समझने का प्रयास करेंगे. किसी एक व्यक्ति को नशे की लत लग जाती है. वह व्यक्ति जब तक नशा नहीं कर लेता, तब तक उसका शरीर एक अजीब सी हालत में रहता है. ऐसा क्यों होता है? क्योंकि उसके शरीर को अब उस नशे की आदत हो गई है. जब वह नशा नहीं करता तो उसके शरीर में नशे की मांग होने लग जाती है. यह शरीर की मांग फिर से उसे नशा करने को मजबूर कर देती है.

जो व्यक्ति नशा करता है या जिसे कोई बुरी लत लगी हुई हो, वह अगर उससे पीछा छुड़ाने की कोशिश करे तो वह इसमें सफल भी हो सकता है. लेकिन उसका शरीर और दिमाग बार-बार उसे उस बुरी आदत की तरह खींचने का प्रयास करते हैं क्योंकि हम वह बुरी आदत उसके शरीर को पूरी तरीके से जकड़ चुकी है.

“अगर कोई प्रयास सच्चा हो तो हर चीज मिल जाती है

कोशिश करने से कोई ना कोई राह निकल आती है

माना कि ये सब एक ही दिन में नहीं बदलने वाला है 

मगर शुरुआत तो करो एक दिन आदत बदल जाती है “

उसके शरीर में उस नशे के कारण बहुत सारे परिवर्तन आ चुके हैं. अब उन परिवर्तनों को वापस अपनी मूल दशा में बदलने के लिए उसे मजबूत इच्छाशक्ति का प्रदर्शन करना होगा. जब-जब भी उसकी इच्छा शक्ति कमजोर पड़ जाएगी, उसे फिर से उस नशे की लत की तरफ बार-बार ध्यान जाएगा. यदि एक-दो दिन वह उस बुरी आदत के बगैर रह भी लेगा तो भी फिर से उसे उस चीज को अपनाने को मजबूर हो जाना पड़ता है.

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good habits essay
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अच्छी आदतें ऐसे अपनाएं (Good Habit Essay)

इसके लिए सबसे बेस्ट तरीका यही है कि वह उस चीज की तरफ ध्यान देना ही बंद कर दे अर्थात उसके बारे में सोचना ही छोड़ दे. यह हम बहुत आसानी से कर सकते हैं. हमारे दिमाग की ये विशेषता है कि ये एक बार में दो चीज पर ध्यान केंद्रित नहीं कर सकता. जब हम कुछ अच्छा सोच रहे होते हैं तो किसी बुरी बात पर हमारा ध्यान सामान्यतया नहीं जाता. ठीक इसी तरह जब हम हमारे दिमाग में कुछ बुरा चल रहा होता है तो फिर अच्छी बातों पर ध्यान केंद्रित करना हमारे लिए संभव नहीं होता.

दिमाग की इस खासियत का लाभ हम अपनी किसी भी बुरी आदत को त्यागने में कर सकते हैं और हम इसमें सौ फीसदी सफल होंगे. जब भी हमारे मन-मस्तिष्क में किसी बुरी आदत का ख्याल फिर से आने लगे तो हमें हमारा ध्यान वहां से हटाकर किसी अच्छी चीज पर केंद्रित करना होगा. शुरुआत में हमें इसके लिए बार-बार प्रयास करना होगा. कुछ दिन बाद हमारा ध्यान स्वतः ही इस चीज पर जो हम सोच रहे हैं, उस पर एकाग्र होने लगेगा और जिस चीज से हम सदा के लिए पीछा छुड़ाना चाहते हैं, वह चीज हमेशा-हमेशा के लिए हमारे विचारों से जरुर हट जाएगी.

जो भी आदत हमारे शरीर को लग चुकी है, उसे बनाने में ही जब काफी समय लगा है, तो जाहिर है कि उससे पीछा छुड़ाने में भी कुछ समय तो जरूर लगेगा. लेकिन तब तक हमें जबरदस्त धर्य और घोर अनुशासन का परिचय देना होगा. किसी चीज को बनाने में जब समय लगता है तो उसे मिटाने में भी थोड़ा समय तो जरूर ही लगता है. अब कितना समय लगेगा, यह हमारी दृढ इच्छाशक्ति और मन के अनुशासन पर निर्भर करता है.

“पहले तो हमें अपने इरादों को खूब मजबूत बनाना होगा 

फिर तब बार-बार खुद ही खुद को ये सब समझाना होगा 

कि बुरी आदत हमें बर्बाद कर ही देती हैं एक ना एक दिन 

इसलिए संकल्प करते हुए बुरी आदतों से पीछा छुड़ाना होगा “

हम अगर मजबूत इच्छाशक्ति का परिचय देते हैं तो हो सकता है कि हमें बुरी आदत से छुटकारा बहुत जल्दी मिल जाए. लेकिन अगर हम अपने मन के विचारों पर नियंत्रण कर पाने में असफल रहते हैं तो हो सकता है कि वह बुरी आदत जिससे हम पीछा छुड़ाना चाहते हैं, वो बार-बार हमारे विचारों में आएगी. हमें फिर से उसी में बने रहने को मजबूर करेगी. जिससे कि अंत में यही होगा कि हम कुछ दिन के लिए उस बुरी आदत को भले ही त्याग दें, लेकिन उससे हम पूरी तरीके से पीछा नहीं छुड़ा पाएंगे, उसे अपने आप से हमेशा के लिए दूर नहीं कर पाएंगे.

इसके लिए हमें अपने विचारों पर, अपने मन पर कठोर नियंत्रण करना होगा. बुरी आदत के ख्याल को भी खुद से बिल्कुल दूर रखना होगा. जब भी ऐसा ख्याल आए तो हमें अच्छी बातों पर, अच्छे विचारों पर अपने ध्यान को एकाग्र चित्त करना होगा. शुरुआत में यह हमारे लिए बहुत मुश्किल होगा.

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आदतों को समय रहते बदल लें (About Good Habits)

लेकिन जैसा कि शुरुआत में ही आपको बताया था कि जिस कार्य को हम रोजाना करने लगते हैं, उसका हमें अभ्यास हो जाता है और वह अभ्यास होते-होते हमारी आदत बन जाता है. तो जब हम अच्छे विचारों पर, अच्छी आदतों पर हमारा ध्यान एकाग्र करने लगेंगे तो बुरी बातें और बुरी आदतें हमारे मन और शरीर से बहुत दूर होती चली जायेंगी. इसमें हमें थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है, लेकिन अंत में हम अपनी बुरी आदतों को अच्छी आदतों से जरूर बदल पाएंगे और यही हमें करने की आवश्यकता भी है.

किसी भी आदत को अपनाने से पहले वह आदत हमारी गुलाम होती है लेकिन उसको रोजाना व्यवहार में, अभ्यास में लाने से हम और हमारा शरीर उस आदत की गुलामी करने लगता है. तो हमारी कोशिश रहनी चाहिए कि हम जहां तक हो सके, बुरी आदतों से खुद को बचा कर रखें और अच्छी आदतों को अपनाएं. यदि कोई बुरी आदत फिर भी जाने- अनजाने में हमें लग गई है तो हमें यथाशीघ्र उससे पीछा छुड़ा लेने का हर संभव प्रयास जरूर करना चाहिए. क्योंकि हम जितनी देरी करते चले जाएंगे, वह चीज उतनी ही मजबूत होती चली जाएगी.

शुरुआत में उस चीज को हटाने में हमें कम प्रयास और कम समय लगेगा, लेकिन जब कोई कमजोर कड़ी बेहद मजबूत बन जाती है तो फिर उस पर अधिक कठोर प्रहार करना पड़ता है. जिसमें अधिक ताकत, अधिक समय और अधिक शक्ति खर्च करनी पड़ती है. तो अगर हम अपनी बुरी आदतों को परिवर्तित करना चाहते हैं तो हमें उस चीज को बिलकुल शुरुआत में ही अपने शरीर से, अपने मन-मस्तिक से दूर हटाने का प्रयास जरुर करना चाहिए. यह बहुत आसान है और हम इसे आरम्भ से ही संभव बना सकते हैं.

“मीलों लम्बा है रास्ता इसलिए लगातार चलना होगा 

जब भी गिर पड़ें तो उठकर फिर से संभलना होगा 

इससे पहले कि बुरी आदतें हमें ही पूरा बदल डालें 

हमें समय रहते अपनी बुरी आदतों को बदलना होगा “

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आदतें विचारों की देन होती हैं (Good Habits Speech)

आदतें चाहे अच्छी हों या बुरी, यह हमारे मन में उपजे विचारों की ही देन होती हैं. अगर हम अपने आप को अच्छी बातें, अच्छे विचारों में व्यस्त रखते हैं तो हमें बुरी बातों पर ध्यान देने का थोड़ा सा भी समय ही नहीं मिल पायेगा और इस प्रकार हम बुरी आदतों से बचे रहते हैं.

लेकिन अगर हम खाली बैठते हैं या हमारे पास कोई जरूरी काम नहीं होता तो हो सकता है कि हमारे मन में कोई बुरी बात या बुरी आदतों का ख्याल आने लगे और फिर हम मजबूरन उस रास्ते पर चल पड़ते हैं. हमारा मस्तिष्क तो कभी विचार करना बंद नहीं करता, यह हर समय कोई ना कोई विचार सोचता रहता है. तो हमारी कोशिश रहनी चाहिए कि हमारे मष्तिष्क को अच्छे विचारों की खुराक बराबर प्राप्त होती रहे.

जो रास्ता हमें शुरुआत में आसान मालूम होता है, आगे जाकर वही पथरीली डगर साबित हो जाता है. हम बाद में भले ही बुरी आदतों से पीछा छुड़ाने की कोशिश भी करते हैं, लेकिन तब तक हमारा बहुत अधिक नुकसान हो चुका होता है. जिसकी भरपाई करने में हमें फिर बहुत ज्यादा समय खर्च करना पड़ता है, बहुत अधिक उर्जा लगानी पड़ती है साथ ही साथ शरीर को भी अत्यंत कष्ट उठाना पड़ता है. इससे अच्छा तो यही है कि हम अपने आप को किसी भी कार्य में व्यस्त रखें, जिससे कि हमें व्यर्थ की बातों को सोचने का अवसर ही ना मिले.

बुरी आदतों को अच्छी आदतों में बदलने के लिए हमें अपनी विचार प्रक्रिया को व्यवस्थित करना होगा. हमें हमारी जिंदगी में हर चीज व्यवस्थित तरीके से करनी होगी. तभी जाकर हम स्वयं में अच्छी आदतों का निर्माण कर सकते हैं एवं उन्हें दीर्घकाल तक खुद में समाहित रख सकते हैं. बुरी आदतों को खुद से दूर रखने में ही हमारी भलाई और समझदारी है. यही वो सबसे बेहतर तरीका है जिसको अपनाकर हम अपनी बुरी आदतों से स्वयं को बचा सकते हैं और अच्छी आदतों को जीवन में उतार सकते है.

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तो दोस्तों ! ये थी आज की पोस्ट – ऐसे बदलें बुरी आदतों को (Good Habits Speech) .आज की ये पोस्टआपको कैसी लगी, हमें अपनी राय या Suggestion जरुर बताइयेगा. और भी ऐसे बेहतरीन लेख पाने के लिए आप हमें Subscribe जरुर कीजिये.

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