how to be self dependent

How To Be Self Dependent-आओ आत्मनिर्भर बनें

आओ आत्मनिर्भर बनें-How To Be Self Dependent

आत्म निर्भर अर्थात किसी भी चीज के लिए दूसरों पर नहीं बल्कि हर चीज के लिए स्वयं पर निर्भर रहना ही आत्मनिर्भर को परिभाषित करता है. आत्मनिर्भरता की व्याख्या में हर छोटी से छोटी वस्तु से लेकर बड़ी से बड़ी चीज हेतु स्वयं पर निर्भरता होती है.

जब हम आत्मनिर्भर बन जाते हैं तो हमारे चारों तरफ एकाएक बहुत कुछ बदलाव हो जाते हैं. ये परिवर्तन सकारात्मक एवं सुखद रूप में हमारे सम्मुख परिलक्षित होते हैं. तो आइये आज की इस पोस्ट- आओ आत्मनिर्भर बनें (How To Be Self Dependent) में हम आत्मनिर्भरता क्या है, हमें आत्मनिर्भर क्यों होना चाहिए तथा आत्मनिर्भरता से होने वाले लाभ कौन-कौनसे हैं, इस संबंध में विस्तार पूर्वक चर्चा करेंगे.

आत्म निर्भरता क्या है (Self Dependent Meaning)?

आत्मनिर्भरता वह स्थिति है, जिसमें कोई भी अपनी किसी भी आवश्यकता हेतु किसी भी अन्य पर निर्भर नहीं होता. अपनी समस्त आवश्यकताओं को वह स्वयं के उपलब्ध संसाधनों द्वारा पूर्ण कर पाने की महत्वपूर्ण स्थिति में होता है. आत्मनिर्भरता की स्थिति किसी भी व्यक्ति, समाज या राष्ट्र के लिए अत्यंत लाभदायक एवं सुखदायी स्थिति होती है.

अपनी दैनिक उपभोग आवश्कताओं को कोई भी व्यक्ति या देश स्वयं से ही पूरा कर पाने में जब सक्षम हो जाता है तो वह आत्मनिर्भर कहलाने का हकदार बन जाता है. आत्मनिर्भरता के लिये अत्यधिक संसाधनों की आवश्यकता होती है. साथ ही साथ किसी व्यक्ति एवं देश का आत्मनिर्भर होना गहन आत्मविश्वास एवं सुविचारित रणनीति की भी मांग करता है.

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आत्म निर्भर क्यों होना चाहिए (Why must be Self Dependent)?

जब कोई इंसान अपने कठोर परिश्रम एवं अध्यवसाय द्वारा आत्मनिर्भरता की स्थिति को प्राप्त कर लेता है तो वह श्रेष्ठ कहलाने की स्थिति में आ जाता है. जाहिर है कि इसके लिए उसे बहुत ही कठोर तपस्या से गुजरना पड़ा होगा. किंतु जब आत्मनिर्भर बन जाता है तो समस्त कष्टों का निवारण हो जाता है. स्वयं की आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु दूसरों का मुँह नहीं ताकना पड़ता. यह बेहद ही सुखप्रद स्थिति होती है.

कोई देश जब आत्मनिर्भर बनने की श्रेणी में आ जाता है तो इससे अच्छी बात कुछ हो ही नहीं सकती. अभी हाल ही में हमारी सरकार द्वारा भी आत्मनिर्भरता का नारा दिया गया है. समस्त देशवासियों को लोकल के लिए वोकल होने को प्रेरित किया गया है. ये हम सब के लिए बेहद ही महत्वपूर्ण एवं क्रांतिकारी कदम साबित होने वाला है.

आत्मनिर्भर होने की दिशा में सबसे पहला कदम स्वदेशीकरण को बढ़ावा देना तथा स्वदेश निर्मित वस्तुओं के प्रयोग में गर्व महसूस करने से आरंभ होता है. हमारी जो भी उपभोक्ता वस्तुएं हैं, उनका निर्माण हमें अपने निज देश में ही करना होता है. तत्पश्चात उनके प्रयोग या उपभोग के संबंध में व्यापक प्रचार एवं प्रसार की आवश्यकता होती है.

स्वदेश निर्मित वस्तुएं राष्ट्र की पहचान से जुड़ी हुई होती हैं. जब लोकल वस्तुओं की गुणवत्ता सबसे बेहतर होती है और उनकी ठीक ढंग से मार्केटिंग की जाती है तो यही चीजें आगे चलकर ग्लोबल पहचान बना लेती हैं. तमाम चीजें जो आज वैश्विक रूप में विख्यात हैं, वे कभी स्थानीय ही हुआ करती थी.

उस देश के नागरिकों ने उन चीजों के प्रति स्वदेशी भावनाओं को जोड़ा, उन चीजों को अपनाया और वैश्विक स्तर पर पहुँचाने के लिए अपनी उन स्वदेशी वस्तुओं का जमकर प्रचार-प्रसार किया. उनका अपने राष्ट्र के प्रति लगाव और जागरूकता ने ही उनको लोकल के प्रति वोकल बनाया और तत्पश्चात उनकी स्वदेशी चीजों ने विदेशी बाजारों पर अपना गहरा प्रभाव और अमिट छाप छोड़ी है.

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आत्मनिर्भर होने से लाभ (Benefits of Self Dependent)

जब कोई व्यक्ति या राष्ट्र आत्मनिर्भर बन जाता है तो उनको इस बात से एकाधिक लाभ प्राप्त होते हैं, जो उनकी स्थिति को अत्यंत बेहतर एवं सुदृढ़ बना देते हैं. ये लाभ दीर्घकालिक होते हैं, जो आगामी पीढ़ियों के लिए भी सफलता का मार्ग प्रशस्त करते रहते हैं.

जब कोई राष्ट्र आत्मनिर्भरता की श्रेणी में शामिल हो जाता है तो उसकी अर्थव्यवस्था अत्यंत सुदृढ़ एवं विकसित हो जाती है. देशवासियों की आर्थिक स्थिति बहुत मजबूत हो जाती है क्योंकि लोगों की क्रयशक्ति बेहतर होती है. इससे लोग अधिक वस्तुओं की खपत करते हैं, जिससे अधिक उत्पादन को प्रोत्साहन मिलता है.

अधिक उत्पादन हेतु अतिरिक्त श्रम शक्ति की आवश्यकता पड़ती है, जिसके कारण देशवासियों को अधिक रोजगार प्राप्त होता है. देश के अधिकांशतः लोगों को रोजगार मिलने से उनकी आर्थिक उन्नति होती है, वे आर्थिक रूप से खुशहाली का जीवन जीने के योग्य बन जाते हैं. यह चीज उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना देती है. जब देश के नागरिक आर्थिक रूप से संपन्न हो जाते हैं तो राष्ट्र के विकास में उनके योगदान में भी उत्तरोत्तर वृद्धि होती चली जाती है.

कोई देश आत्मनिर्भर तभी बनता है, जब उस देश के वासियों द्वारा स्वदेशीकरण को बढ़ावा प्रदान किया जाता है. बाहरी वस्तुओं को खरीदने से देश का धन देश से बाहर चला जाता है, जिसका देश को बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. देश से बाहर जा चुका धन राष्ट्र के निर्माण में कोई योगदान भी नहीं करता, जिस कारण देश एवं देशवासियों की आर्थिक संपन्नता के अवसरों में बहुत गिरावट आ जाती है.

बाहरी वस्तुओं की खरीद को बढ़ावा देने से स्वदेशी उत्पादों के निर्माण को गहरा धक्का या चोट पहुँचती है और जिससे अंत में स्वदेशीकरण की हार हो जाती है. अत: आत्मनिर्भर बनने के लिए विदेशी का बहिष्कार करना एवं स्वदेशी को स्वीकार करना बेहद आवश्यक हो जाता है. एक विकसित राष्ट्र के रूप में अपने को स्थापित करने हेतु किसी भी देश का आत्मनिर्भर होना पहली एवं आवश्यक शर्त होती है. इसलिये यही हमारा ईमानदार प्रयास रहे कि स्वयं एवं राष्ट्र को आत्मनिर्भर बनाने के लिये हम सदैव तत्पर रहें तथा इसमें अपना यथासम्भव और यथोचित योगदान करें.

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तो दोस्तों ! ये थी आज की पोस्ट-आओ आत्मनिर्भर बनें (How To Be Self Dependent).आज की ये पोस्टआपको कैसी लगी, हमें अपनी राय या Suggestion जरुर बताइयेगा. और भी ऐसे बेहतरीन लेख पाने के लिए आप हमें Subscribe जरुर कीजिये.

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