Patriotism Essay in Hindi

Patriotism Essay in Hindi-ये भी तो है देश भक्ति

ये भी तो है देश भक्ति-Patriotism Essay in Hindi

सरहद पर तैनात हमारे वीर सैनिक, दुश्मन को मुँह तोड़ जवाब देते हुए अंत में अपने प्राण न्यौछावर कर जाते हैं. मातृभूमि और देश रक्षा हेतु इनका बलिदान देशभक्ति की सर्वोच्च पराकाष्ठा है. इनकी देशभक्ति को पूरा देश शत-शत नमन करता है. अब रही बात शेष देशवासियों की, तो वीर सैनिकों के त्याग को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए हमें भी कुछ ऐसा करने की आवश्यकता है, जिससे शहीदों का बलिदान व्यर्थ ना जाये.

हम ऐसा क्या कर सकते हैं कि हमारे कार्यों से भी देशभक्ति की खुशबू आये और वीर सैनिकों की शहादत को सच्ची श्रद्धांजली अर्पित कर सकें. ये माना कि हर कोई सरहद पर जाकर देश के लिए लडा़ई नहीं लड़ सकता या मातृभूमि के लिए कुर्बानी नहीं दे सकता. लेकिन हम अपने स्थान पर रह कर भी बहुत कुछ देश भक्ति के कार्य कर सकते हैं. तो आइये, आज की पोस्ट –ये भी तो है देश भक्ति (Patriotism Essay in Hindi) में हम इन्हीं तरीकों की चर्चा करेंगे.

वीर शहीदों के परिवारों को यथोचित सम्मान दें

जो वीर सैनिक हमारे देश की, हमारी मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे चुके हैं, हमें ना केवल उनका बल्कि उनके परिवार का भी बहुत अधिक सम्मान और खयाल करने की आवश्यकता है. क्योंकि उन्होंने अपने प्राणों की चिंता नहीं की और उन्होंने हमारी सुरक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान किया है.

अब उनके परिवार की चिंता और सुरक्षा करने की जिम्मेदारी शेष देशवासियों की है. हमारी कोशिश रहनी चाहिए कि उन्हें किसी भी प्रकार की कोई दिक्कत ना हो. शहीदों के परिवार अगर किसी प्रकार की दिक्कत में है तो हमें आगे बढ़कर उनके लिए सर्वश्रेष्ठ करने में कोई कसर नहीं उठा रखनी चाहिए. यही हमारे वीर शहीदों को हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी और यह भी एक प्रकार की सच्ची देशभक्ति कहलायेगी.

देश के संविधान और उसके आदर्शों का पालन करें

हमें हमारे देश के संविधान और उसमें वर्णित आदर्शों का सदैव ईमानदारी से पालन करना चाहिए. हमें सदैव देश की एकता एवं अखंडता को अक्षुण्ण बनाये रखने वाले कार्य ही करने चाहिए. हमको कभी भी जाति,भाषा, क्षेत्र और धर्म के आधार पर स्वयं को विभाजित नहीं होने देना है.

हमारे देश ने आरंभ से ही संपूर्ण विश्व के सामने अनेकता में एकता का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत किया है. हमारे देश की मिसाल दी जाती रही है कि तमाम विविधताओं से भरा होने के बावजूद हम राष्ट्र के रूप में एक हैं और हमें भी सदैव अपने मन-मस्तिष्क में इसी बात को गहराई से सोचना है और जीवन में इसे पूरी तरह लागू करना है.

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नियम और कानूनों का पालन करें

हर एक चीज के लिए नियम और कानून बने होते हैं. उन नियम और कायदों का पालन करना हर एक नागरिक का कर्तव्य है. समस्त नियम और कानून हमारी भलाई एवं सुरक्षा की आवश्यकता को ध्यान में रखकर बनाए गए होते हैं. हमें हर हाल में देश के बनाए गए नियम और कानूनों का पालन जरूर करना चाहिए.

ऐसा करने से ना हम केवल खुद को सुरक्षित रख सकते हैं बल्कि देश को भी और अधिक सुरक्षित बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान कर सकते हैं. भूलकर भी कभी कानून को अपने हाथ में नहीं लें, क्योंकि इससे देश की छवि खराब होती है.

हमेशा याद रखें कि कानून की नजरों में सभी लोग समान हैं और इसी समानता के चलते हमें अपने कर्तव्य का निर्वहन सदैव ईमानदारी से करना चाहिए. जो भी नियम और कानून हमारे लिए हमारे प्यारे देश ने बनाए हैं, उनका पालन हमेशा हमें जरूर करना चाहिए. यह भी हमारी इस देश के प्रति एक तरह की देशभक्ति ही कहलायेगी.

speech on patriotism
speech on patriotism

देश को स्वच्छ बनाये रखने में योगदान करें

स्वच्छता ईश्वर का दूसरा रूप है. साफ-सफाई से रहने से ना केवल हमारा शरीर स्वस्थ रहता है बल्कि देखने वाले को दूसरों को भी अच्छा लगता है. हम जिस भी जगह पर रहते हैं वहां पर पूरी साफ सफाई रखें. ऐसा करने से हम अनेक बीमारियों से बचे रहेंगे.

देश में हमारी सरकार द्वारा समय-समय पर स्वच्छ भारत मिशन जैसे कार्यक्रम इसीलिए चलाए गए हैं कि हम सर्वप्रथम अपनी जगह को साफ-सुथरा रखें और फिर हम सभी देशवासी मिल कर इस देश को साफ-सुथरा रखने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देंगे.

हम जिस पर्यावरण में रहते हैं, उसको साफ-सुथरा रखना हमारी ही जिम्मेदारी है. अगर पर्यावरण साफ-सुथरा होगा तो हम शुद्ध हवा में सांस ले पाएंगे. यदि हम अपनी जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी से निभाते हैं तो हमारी साफ-सफाई की ये अच्छी आदत एक दिन पूरे देश को साफ- सुथरा बना देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.

बेसहारा और असहाय लोगों की मदद करें

समाज का जो भी वंचित वर्ग है या जो बेसहारा और असहाय लोग हैं, उनकी मदद करना एक तरह से ईश्वर की भक्ति करना भी कहलाता है. यदि हम किसी काबिल हैं तो हमें दीन-दुखियों की मदद जरूर करनी चाहिए क्योंकि वे भी इसी देश के नागरिक हैं. वे भी इस देश की मिट्टी में ही पले-बढ़े हैं और समय आने पर देश भक्ति दिखाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेंगे.

अगर हम समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों को अपने सार्थक प्रयासों द्वारा आगे की पंक्ति में ले आते हैं तो वे लोग भी हमारे देश की प्रगति एवं उन्नति में अपना बहुत बड़ा योगदान दे सकते हैं. और यह एक प्रकार की देश सेवा कहलाएगी जो कि सही मायने में देशभक्ति भी होगी.

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दूसरों के विचारों का सम्मान करें

सभी इंसानों की विचार प्रक्रिया एक जैसी नहीं हो सकती. सभी अपने-अपने ढंग से सोचते हैं. इसलिए प्रत्येक व्यक्ति के विचारों में और दूसरे के विचारों में भिन्नता होनी स्वाभाविक है. लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं कि हम हमेशा सही हैं और सामने वाला हमेशा गलत है. ऐसा सोचने से संघर्ष बढ़ता है और देश की प्रगति में रुकावट आती है.

अगर हम दूसरे के विचारों का सम्मान करते हैं तो हम एक जिम्मेदार और अच्छे नागरिक कहलाते हैं. हमें कभी अपने विचार दूसरों पर थोपने का प्रयास बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए. हमें दूसरे के विचारों का भी उतना ही सम्मान करना चाहिए, जितना हम स्वयं के विचारों का करते हैं. एक-दूसरे के विचारों का सम्मान करके हम देश को प्रगति के पथ पर अग्रसर कर सकते हैं.

सामाजिक बुराइयों को मिटाने में सहयोग करें

प्रत्येक समाज में विभिन्न प्रकार की सामाजिक कुरीतियां एवं बुराइयाँ पाई जाती हैं. यह बुराइयाँ व्यक्तिगत रूप से या व्यष्टि रूप में एक नागरिक के लिए तो हानिकारक हैं ही, समष्टि रूप में यह देश के लिए भी अत्यंत नुकसान दायक हैं. इन बुराइयों से सदैव समाज एवं देश को हानि ही पहुंची है.

तो हमारा कर्तव्य है कि हमारे आस-पास जो भी सामाजिक बुराइयाँ हैं, हमें स्वयं तो उन बुराइयों से बचना ही है, साथ ही साथ दूसरे लोग जो उन सामाजिक कुरीतियों में सम्मिलित हैं, उनका भी हमें पुरजोर विरोध करना चाहिए और उन्हें सही रास्ते पर लाने का यथोचित प्रयास करना चाहिए. ऐसा करने से देश की प्रगति के लिए यह बहुत ही उपयोगी एवं लाभकारी कदम सिद्ध होगा. यही हमारी देशभक्ति का परिचायक भी होगा.

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स्वयं को स्वस्थ एवं तंदुरुस्त बनाये रखें

स्वस्थ शरीर ही सबसे बड़ा धन है. अगर शरीर स्वस्थ नहीं है तो अकूत धन-दौलत या नाना प्रकार की संपदा भी मन को शांति प्रदान नहीं कर सकती. शरीर निरोगी एवं चंगा होने पर ही हम दुनिया में उपलब्ध प्रत्येक चीज का आनंद उठा सकते हैं. इसके लिए आवश्यक है कि हम अपने शरीर अपने मन को स्वस्थ रखने के लिए नियमित रूप से व्यायाम, प्राणायाम और योगा इत्यादि करने की महत्वपूर्ण आवश्यकता को समझें.

जब हम शारीरिक एवं मानसिक रूप से पूर्ण  स्वस्थ होंगे तो हम अधिक उत्पादकता से काम कर पाएंगे. जब हम अपने कार्य को संपूर्ण उत्पादक रूप में करेंगे तो यह देश की प्रगति में बहुत बड़ा योगदान साबित होगा. हमारे देश में प्रत्येक वर्ष विभिन्न बीमारियों के इलाज पर करोड़ों में खर्चा होता है.

अगर देश का प्रत्येक नागरिक स्वयं को स्वस्थ रखने की मुहिम में शामिल हो जाए तो जो पैसा अस्पताल में बीमारियों पर खर्च होता है वह पैसा बच जाएगा और उस पैसे को देश की उन्नति एवं प्रगति में खर्च किया जा सकता है.  इसलिए हमें देश द्वारा चलाई जा रही फिट इंडिया जैसी मुहिम में शामिल होकर स्वयं को स्वस्थ एवं तंदुरुस्त बनाए रखने की ईमानदार कोशिश हर हाल में करने की आवश्यकता है.

हमें बदलते समय में स्वयं को देश सेवा के इस नए रूप में ढालना ही होगा, जिससे कि हम स्वस्थ नागरिक के रूप में इस समाज को, इस देश को अपना बेहतरीन और सर्वश्रेष्ठ दे पाएंगे. जिससे हमारा देश फिर से महान और विश्व गुरु बन पाएगा. यही हमारे देश के प्रति हमारी सच्ची देशभक्ति कहलाएगी.

संसाधनों का इष्टतम उपयोग करें

देश के जो भी समस्त उपलब्ध संसाधन हैं, उन पर प्रत्येक नागरिक का समान अधिकार है. इसीलिए हमें अपने संसाधनों को बेकार में नष्ट करने से बचना चाहिए. अगर हम इनका बुद्धिमत्ता पूर्ण सदुपयोग करते हैं तो यह आने वाली पीढ़ियों के लिए भी बचे रहेंगे.

हमें अपने ही बारे में नहीं सोचना चाहिए बल्कि देश के अन्य नागरिकों के बारे में भी सोचना है. अगर हमारे पास जरूरत से ज्यादा है तो हमें उसे दूसरों के साथ मिल-बांटने की आवश्यकता है. बहुत सारे लोग देश में ऐसे भी हैं, जिन के पास  जीवन यापन के भी पर्याप्त संसाधन नहीं हैं. इसलिए अगर हम ऐसे लोगों को संसाधनों में बराबरी का हक दे देते हैं तो यह भी देश सेवा और देशभक्ति का ही रूप होगा.

स्वदेशी वस्तुओं को बढ़ावा दें

हमें जहां तक हो सके, अपने देश में निर्मित वस्तुओं का ही उपयोग करना चाहिए. ऐसा करने से अनेक लाभ होंगे. पहला, इससे ना केवल हमारा पैसा दूसरे देशों में जाने से बच जाएगा बल्कि देश में स्वदेशी उत्पादन को अधिक प्रोत्साहन मिलेगा. दूसरा, इससे बहुत सारे लोगों को रोजगार मिलेगा. तीसरा, लोगों के पास फिर अधिक क्रयशक्ति या क्रय क्षमता उत्पन्न होगी, जिससे देश में आर्थिक खुशहाली आएगी.

स्वदेश निर्मित उपभोक्ता वस्तुओं को अत्यधिक प्रोत्साहन देने की आवश्यकता है. क्योंकि देश निर्माण में स्वदेशी को अंगीकार करने से देश तेजी से प्रगति के पथ पर अग्रसर हो जाएगा. और फिर यह यथार्थ रूप में हमारी सच्ची देशभक्ति और देश सेवा कहलायेगी.

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